1
1
(हर्ष श्रीवास्तव) जालंधर। शहर और आसपास के इलाकों में अवैध शराब का कारोबार प्रशासन और एक्साइज विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है। 20 जून से 31 जुलाई के बीच एक्साइज विभाग ने करीब 38 मामलों में कार्रवाई करते हुए अवैध शराब और लाहन बरामद की। कार्रवाई के दौरान कई आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ-साथ कुछ मामलों में अवैध शराब की तस्करी में इस्तेमाल वाहनों को भी जब्त किया गया।
हालांकि लगातार हो रही कार्रवाई के बावजूद सवाल यह है कि अवैध शराब के इस कथित नेटवर्क को संचालित करने वाले बड़े तस्करों और सप्लायरों तक जांच कब पहुंचेगी।
अवैध शराब का कारोबार सिर्फ कानून-व्यवस्था से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर सरकारी राजस्व पर भी पड़ता है। बिना लाइसेंस शराब की बिक्री करने वाले लोग सरकारी शुल्क और टैक्स से बचकर कारोबार करते हैं। इससे सरकार के साथ-साथ लाइसेंस प्राप्त शराब कारोबारियों को भी आर्थिक नुकसान होने की आशंका रहती है।
शहर के अलग-अलग इलाकों में अवैध शराब की बिक्री को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। सूचना मिलने पर विभाग की ओर से छापेमारी और बरामदगी की कार्रवाई की जाती है, लेकिन सवाल अब भी बना हुआ है कि छोटे आरोपियों के पीछे काम करने वाले कथित बड़े नेटवर्क तक जांच कितनी पहुंच पाती है।
अवैध देसी शराब तैयार करने के लिए दरिया किनारे और सुनसान इलाकों का इस्तेमाल किए जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। बिना निर्धारित मानकों के तैयार की जाने वाली शराब लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। विशेष रूप से मिलावटी या जहरीले रसायनों के इस्तेमाल की स्थिति में इसके गंभीर स्वास्थ्य परिणाम हो सकते हैं।
ऐसे में केवल तैयार शराब की बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। जरूरत इस बात की है कि शराब के निर्माण से लेकर सप्लाई और बिक्री तक पूरी चेन की पहचान की जाए।
20 जून से 31 जुलाई के बीच करीब 38 मामलों में कार्रवाई यह संकेत देती है कि अवैध शराब की समस्या अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि पकड़े गए आरोपियों तक शराब की सप्लाई कौन पहुंचा रहा था और इसके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय हैं।
यदि कार्रवाई केवल छोटे स्तर के आरोपियों तक सीमित रहती है और कथित बड़े सप्लायर या नेटवर्क संचालक जांच की पहुंच से बाहर रहते हैं, तो अवैध कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाना मुश्किल हो सकता है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि अवैध और मिलावटी शराब की बिक्री करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि यदि बिना मानकों के तैयार शराब बाजार तक पहुंच रही है, तो उसके निर्माण स्थल, सप्लाई चैन और बिक्री केंद्रों की भी जांच होनी चाहिए।
इसके लिए एक्साइज विभाग और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय के साथ संयुक्त कार्रवाई की जरूरत बताई जा रही है, ताकि निर्माताओं, सप्लायरों, तस्करों और कथित नेटवर्क संचालकों तक जांच पहुंच सके।
एक्साइज विभाग की कार्रवाई के बावजूद यदि अवैध शराब की बिक्री और सप्लाई जारी रहती है, तो यह जांच का विषय है कि गिरफ्तारियों और बरामदगी के बाद नई सप्लाई कैसे पहुंच रही है।
अब जरूरत सिर्फ छापेमारी और छोटी बरामदगी तक कार्रवाई सीमित रखने की नहीं, बल्कि अवैध शराब के पूरे नेटवर्क की पहचान कर उसके खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई करने की है। इससे न केवल सरकारी राजस्व की रक्षा होगी, बल्कि लोगों की सेहत और सुरक्षा से जुड़े खतरे को भी कम किया जा सकेगा।

