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(हर्ष श्रीवास्तव) जालंधर। जालंधर में ADCP-2 के पद पर PPS अधिकारी माधवी शर्मा की तैनाती के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर शहर में चर्चाएं तेज हो गई हैं। दावा किया जा रहा है कि गैंगस्टर और आपराधिक गतिविधियों से जुड़े संदिग्ध ठिकानों पर अब पुलिस पहले की तुलना में अधिक सख्ती से कार्रवाई कर रही है।
इसी कड़ी में अमन फतेह गैंग से कथित तौर पर जुड़े कुछ ठिकानों पर पुलिस रेड किए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि कार्रवाई के दौरान अमन के पिता सेमा को पुलिस ने हिरासत में लिया था। हालांकि, इसी दौरान भीड़ द्वारा कथित रूप से सेमा को पुलिस की हिरासत से छुड़ाकर ले जाने की सूचना भी सामने आई है।
फिलहाल पुलिस की ओर से इस पूरे घटनाक्रम को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
मामले में एक और गंभीर जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि थाना बस्ती बावा खेल के SHO जय इंदर पर कथित तौर पर पुलिस रेड से पहले सूचना लीक करने के आरोप लगे हैं।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस मामले में SHO के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई किए जाने की बात सामने आ रही है। हालांकि, निलंबन का आधिकारिक कारण और विभागीय कार्रवाई की पूरी स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है।
अगर रेड से पहले पुलिस कार्रवाई की सूचना लीक होने की पुष्टि होती है, तो यह पुलिस विभाग की आंतरिक गोपनीयता और कार्रवाई की रणनीति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
इसी बीच श्री देवी तालाब मंदिर से जुड़े पुराने घटनाक्रम को लेकर भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं। मेयर विनीत धीर की शुक्राना यात्रा के दौरान कथित पथराव की घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर अब नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है।
सवाल उठाया जा रहा है कि यदि उस घटना में किसी गैंगस्टर समूह या आपराधिक तत्वों की भूमिका की आशंका थी, तो पुलिस ने उस समय कितनी प्रभावी कार्रवाई की थी?
क्या संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की गई थी? कितने लोगों की पहचान हुई? कितने संदिग्धों से पूछताछ की गई और कितनी गिरफ्तारियां हुईं?
इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि उस मामले में पुलिस की कार्रवाई किस स्तर तक पहुंची थी।
देवी तालाब मंदिर पथराव मामले को लेकर कुछ लोगों द्वारा न्यायालय का रुख करने की तैयारी की चर्चा भी सामने आ रही है। संभावित याचिका के माध्यम से पुलिस से यह स्पष्ट करने की मांग किए जाने की बात कही जा रही है कि इस घटना को लेकर FIR दर्ज की गई थी या नहीं।
यदि FIR दर्ज हुई थी, तो अब तक कितनी गिरफ्तारियां हुईं, कितने संदिग्धों की पहचान हुई और जांच किस स्तर पर पहुंची—इन सवालों का जवाब भी मांगा जा सकता है।
वहीं, यदि FIR दर्ज नहीं की गई थी, तो उसके पीछे क्या कारण रहे, यह भी महत्वपूर्ण सवाल हो सकता है।
ADCP-2 माधवी शर्मा के नेतृत्व में कथित तौर पर सामने आ रही कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जालंधर पुलिस गैंगस्टर और आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ एक अधिक सक्रिय और लक्षित अभियान की ओर बढ़ रही है?
हालांकि, किसी भी पुलिस अभियान की सफलता का वास्तविक आकलन केवल रेड या हिरासत तक सीमित नहीं किया जा सकता। इसकी असली तस्वीर गिरफ्तारियों, बरामदगी, जांच की प्रगति और अदालत में पेश किए जाने वाले ठोस साक्ष्यों से सामने आएगी।
फिलहाल जालंधर की निगाहें पुलिस की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह अभियान केवल कुछ कार्रवाई तक सीमित रहता है या पुलिस कथित आपराधिक नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने के लिए व्यापक कार्रवाई करती है।
नोट: इस खबर में शामिल कुछ जानकारी प्रारंभिक/उपलब्ध सूचनाओं और चर्चाओं पर आधारित है। संबंधित पुलिस अधिकारियों की आधिकारिक पुष्टि या स्पष्टीकरण मिलने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।

