Popular Posts

जालंधर में अवैध निर्माण का बड़ा आरोप: सील तोड़कर खड़ी हुई तीन मंजिला बिल्डिंग, शिकायत विजीलैंस तक पहुंची

(हर्ष श्रीवास्तव) जालंधर। शहर के फगवाड़ा गेट इलाके में कथित अवैध निर्माण का मामला सामने आने के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि MK Trading Co. नामक दुकान पर पहले नगर निगम द्वारा लगाई गई सील को तोड़कर न सिर्फ दोबारा निर्माण शुरू किया गया, बल्कि सात दुकानों पर तीसरी मंजिल तक ढांचा खड़ा कर दिया गया।

सूत्रों के मुताबिक यह इमारत कुछ वर्ष पहले कांग्रेस सरकार के दौरान नियमों के उल्लंघन के चलते सील की गई थी। अब आरोप है कि सील को कथित तौर पर तोड़कर नगर निगम अधिकारियों से “सेटिंग” के जरिए निर्माण कार्य फिर शुरू करवा दिया गया। चर्चा है कि इस पूरे मामले में कुछ अधिकारियों तक मोटी रकम पहुंचाई गई और एक कथित दलाल के जरिए मामला सेट करवाया गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि दुकानदार ने अपने रसूख का हवाला देते हुए सील हटाकर निर्माण जारी रखा। हैरानी की बात यह भी बताई जा रही है कि नगर निगम मुख्यालय से ज्यादा दूर नहीं स्थित फगवाड़ा गेट मार्केट में कई अन्य कमर्शियल इमारतें भी कथित तौर पर इसी तरह अवैध रूप से तैयार की जा रही हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही।

बताया जा रहा है कि जिस इमारत पर पहले सील लगी थी, वहां अब तीन मंजिला ढांचा तैयार कर दिया गया है और उसमें लिफ्ट भी स्थापित कर दी गई है। मामले की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय और पंजाब विजीलैंस ब्यूरो तक पहुंचने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

सूत्रों के अनुसार विजीलैंस तक शिकायत पहुंचते ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है और अब इस मामले में बड़े अधिकारियों पर भी जांच की आंच आने की संभावना जताई जा रही है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों और बिल्डिंग मालिक के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है।

फगवाड़ा गेट जैसे व्यस्त व्यावसायिक इलाके में नियमों की अनदेखी कर बहुमंजिला निर्माण को सुरक्षा की दृष्टि से भी खतरा माना जा रहा है। फिलहाल सबकी निगाहें विजीलैंस जांच और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।


बिल्डिंग मालिक ने आरोपों को बताया निराधार

दूसरी ओर MK Electronics के मालिक मनोज कपिला ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि उनकी बिल्डिंग वर्ष 2010 में बनी थी और कोई नया निर्माण नहीं कराया गया है।

उन्होंने कहा, “सील तोड़ने की बात तब होगी जब बिल्डिंग सील हुई हो। हमारी बिल्डिंग नगर निगम की ओर से कभी सील नहीं की गई और न ही किसी तरह की कोई कार्रवाई हुई है।”

मनोज कपिला के अनुसार जिस लिफ्ट की चर्चा हो रही है, वह कई साल पहले लगवाई गई थी और हाल ही में केवल उसे बदलकर नई आधुनिक लिफ्ट लगाई गई है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग उन्हें जानबूझकर परेशान कर रहे हैं।


रिश्वत और ‘पीली पत्रकारिता’ की भी चर्चा

सूत्रों के मुताबिक इस पूरे विवाद के दौरान शहर में कथित “पीली पत्रकारिता” की भी चर्चा है। आरोप है कि कुछ लोगों ने मामले को दबाने के लिए लाखों रुपये लेने की कोशिश की। चर्चा यह भी है कि एक कथित पत्रकार पर लगभग 8 लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप लगाए जा रहे हैं, जबकि अन्य मीडियाकर्मियों को भी लाखों रुपये बांटे जाने की बातें सामने आ रही हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।


अधिकारियों का क्या कहना है

नगर निगम कमिश्नर संदीप ऋषि ने कहा कि मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं है, लेकिन यदि कोई शिकायत आई है तो उसकी जांच करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार का अवैध निर्माण या नियमों का उल्लंघन पाया गया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

वहीं एमटीपी मेहरबान सिंह ने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है और एरिया इंस्पेक्टर ने भी किसी नोटिस की जानकारी से इंकार किया है। उन्होंने बताया कि संबंधित फाइल मंगवाई गई है और जांच के बाद बनती कार्रवाई की जाएगी।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *